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PUKHARAJ YELLOW SAPPHIRE

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Pukharaj

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पुखराज


हिन्दी नाम :                पुखराज
अंग्रेजी नाम :               Yellow Sapphire
उपयुक्त ग्रह :                गुरु
उपयुक्त उपरत्न               Topaz,Sunaila
उपयुक्त दिन :               गुरुवार
उपयुक्त अंगुली               First finger

उपयुक्त रंग                   Yellow
उपयुक्त धातु                  Gold or Panch Dhatu or Ashtadhatu
उपयुक्त वजन                 As advised by Astrologer.
 

उपयुक्त मंत्र                ऊँ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः
            
                                  उपयुक्त अपेक्षित लाभ    

जब किसी व्यक्ति की जन्म या वर्ष कुंडली में गुरु शुभ फल दायी न हो तो, उसे शुक्ल पक्ष के बृहस्पतिवार को शुभ मुहूर्त में निम्नलिखित मंत्र का १९,००० की संखया में पाठ करना तथा तदुपरांत दशांश संखया में हवन करना कल्याणकारी होगा।

तंत्रोक्त गुरु मंत्र


पीले चावल , पुखराज , चने की दाल , हल्दी , शहद , पीला कपडा , पीले पुष्प , व पीले फल (जैसे आम, केले आदि) कांस्य पात्र , घोडा , लवण , शक्कर , घी , धर्मग्रंथ , सुवर्ण , पीली मिठाई , दक्षिणा आदि।

अन्य उपाय


१    सोने या चांदी की अंगुठी में तर्जनी अंगुली  में तथा शुभ     मुहूर्त में पुखराज धारण करे।
२    २७ गुरुवार केसर का तिलक लगाना तथा केसर की पुडिया पीले रंग के कपडे या कागज में अपने पास रखना शुभ होगा।
३    चलते पानी में बादाम एवं नारियल पीले कपडे में लपेटकर बहाना शुभ होगा।
४    पीपल के वृक्ष को गुरुवार एवं शनिवार के दिन गुरु का बीज मंत्र एवं गुरु गायत्री मंत्र पढते हुए जल दें।
५    वृद्ध ब्राहमण को यथा शक्ति पीली वस्तुएं जैसे - चने की दाल , लड्‌डू , पीले वस्त्र , शहदादि का दान करना चाहिये।

 

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दान योग्य वस्तुएं :

पीले चावल , पुखराज , चने की दाल , हल्दी , शहद , पीला कपडा पीले पुष्प व पीले फल (जैसे आम, केले आदि) कांस्य पात्र , घोडा , लवण , शक्कर , घी धर्मग्रंथ , सुवर्ण , पीली मिठाई , दक्षिणा आदि.

गुरु को अनुकूल बनाने के लिये अन्य उपाय

१    सोने या चांदी की अंगुठी में तर्जनी अंगुली  में तथा शुभ मुहूर्त में पुखराज धारण करे।

२    २७ गुरुवार केसर का तिलक लगाना तथा केसर की पुडिया पीले रंग के कपडे या कागज में अपने पास रखना शुभ होगा।

३    चलते पानी में बादाम एवं नारियल पीले कपडे में लपेटकर बहाना शुभ होगा।

४    पीपल के वृक्ष को गुरुवार एवं शनिवार के दिन गुरु का बीज मंत्र एवं गुरु गायत्री मंत्र पढते हुए जल दें।

५    वृद्ध ब्राहमण को यथा शक्ति पीली वस्तुएं जैसे – चने की दाल , लड्‌डू , पीले वस्त्र , शहदादि का दान करना चाहिये।

पीले पुखराज का परिचय

1.      पुखराज बृहस्पति ग्रह का रत्न है ।

2.      बृहस्पति ग्रह को अनुकूल बनाने के लिये इस रत्न को सोने की अंगुठी में जडवाकर सीधे हाथ की तर्जनी अंगुली में किसी शुभ गुरुवार के दिन ज्योतिष परामर्द्गा के उपरांत पहना जा सकता है।

3.      वास्तविक (पुखराज) से जिस रत्न का आशय है। वह कुरुंदम वर्ग का खनिज रत्न है तथा नीलम माणिक्य रत्नों का वंशज है।

4.      पुखराज के उपरत्नों में पेरीडोट , आलिविन , क्रायसोलाइट व स्फटिक – पुखराज मुख्य है।

5.      पुखराज मुखयतः श्रीलंका ,बर्मा , ब्राजील में पाया जाता है।

6.      पुखराज रत्न दिखने में सुंदर , पारदर्शी  व चमकीला तथा चिकना होता है।

पुखराज से रोग उपचार

1.       पुखराज की गोलियों का प्रयोग पितृ विकार , हदय रोग , रक्तचाप , आदि में लाभदायक है।

2.      पीलीया के मरीज को शहद के साथ घिसे हुए पुखराज को चटाने से लाभ होता है।

3.      पुखराज की भस्म खांसी हड्‌डी का दर्द , जोडो का दर्द , आदि रोगों में लाभदायक है।

4.      पुखराज को जल में रखकर उस जल को प्रयोग करने से रक्त संबधी और पाचन संबधी रोग दूर होते है।

5.      इसके अलावा विष – प्रभाव , वायु – प्रकोप , चर्म – विकार , कुष्ठ – रोग , आदि में पुखराज का उपयोग लाभदायक होता है।

6.      पुखराज को यदि कुछ देर तक मुंह में रखा जाये तो मुंह से सुगंध आने लगती है तथा दांत मजबूत होते है।

नोट : पुखराज द्वारा रोग उपचार किसी विद्वान वैद्य या जानकार के परामर्श के बाद ही करना चाहिये।

पुखराज का धारण विधान  लाभ

बृहस्पति ग्रह को अनुकूल बनाने के लिये इस रत्न को बृहस्पति के तांत्रिक मंत्र से अभिमंत्रित करके सोने की अंगुठी में जडवाकर सीधे हाथ की तर्जनी अंगुली में किसी शुभ गुरुवार के दिन ज्योतिष परामर्द्गा के उपरांत पहना जा सकता है.

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