रेखाएं भी कुछ कहती है

रेखाएं भी कुछ कहती है

Search  by Ashutosh Joshi

भौंहों के स्थान से लेकर सिर के केश तक तथा दाएं कनपटी से लेकर बाएं कनपटी तक तक के स्थान को ललाट(माथा)कहते हैं। ललाट स्थान पर कुछ मुख्य रेखाएं होती हैं। शरीर लक्षण विज्ञानियों ने रेखाओं के गुणधर्म तथा ललाट पर उनकी स्थिति के अनुसार उन्हें क्रमश: शानि, गुरु, मंगल, बुध, चंद्र तथा सूर्य रेखा आदि के नाम से संबोधित किया है। इन रेखाओं के आधार पर जातक के भविष्य के बारे में जाना जा सकता है-

शनि रेखा- यह ललाट के सबसे ऊपर होती है। यदि एक उन्नत ललाट पर शनि रेखा हो तो ऐसे जातक में एकांतप्रिय, रहस्यात्मकता, गंभीरता तथा अंहकार आदि गुण होते हैं। ऐसे जातक सफल जादूगर, ज्योतिर्विद व तांत्रिक भी हो सकते हैं।

बृहस्पति रेखा- शनि रेखा से नीचे गुरु रेखा होती है। यदि ललाट पर बड़ी व स्पष्ट गुरु रेखा हो तो जातक आत्मविश्वासी, साहसी, अध्ययनशील तथा महत्वकांक्षी होता है।

मंगल रेखा- गुरु रेखा के नीचे मंगल रेखा होती है। यदि सपाट ललाट पर मंगल रेखा हो तो ऐसे जातक साहसी, स्वाभिमानी, वीर, दूरदर्शी, विवेकी व रचनात्मक प्रवृत्ति का होता है।

बुध रेखा- यह रेखा ललाट के मध्य में होती है। यह रेखा शुभ गुणों से युक्त हो तो जातक में तीव्र स्मरण शक्ति, मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण, बुद्धिमान एवं पारखी प्रकृति का होता है।

शुक्र रेखा- यह रेखा बुध रेखा से नीचे होती है। यह रेखा पुष्ट हो तो जातक में स्फूर्ति, आशा, उत्साह, स्वछंदप्रियता, उच्च जीवनीशक्ति आदि गुण होते हैं।

सूर्य रेखा- यह रेखा सीधी आंख की भौंह के ऊपर होती है। सूर्य रेखा समृद्ध हो तो ऐसे जातक अच्छे गणितज्ञ, यांत्रिक सम्पादक, शासक या नेता हो सकते हैं।

चंद्र रेखा- बाएं नेत्र की भौंह के ऊपर यह रेखा होती है। यह रेखा उन्नत हो तो जातक कलाप्रेमी, विकसित बुद्धि, भावुक, संवेदनशील तथा आध्यात्मप्रि होते हैं।

हमारी किस्मत के संबंध में दिलीप कुमार और संजय दत्त की हिट फिल्म विधाता का यह गाना हाथों की चंद लकीरों का, ये खेल है तकदीरों का… काफी सही अर्थ बताता है। ज्योतिष के अनुसार हमारे जीवन से जुड़ी हर छोटी-बड़ी घटना का संकेत हमारे हाथों की रेखाओं में छुपा होता है। इन रेखाओं के सही अध्ययन से मालुम किया जा सकता है कि कोई व्यक्ति जीवन में कितनी उन्नति करेगा? कितनी सफलताएं या असफलताएं प्राप्त करेगा? व्यक्ति का स्वास्थ्य कैसा रहेगा या उसका विवाहित जीवन कैसा होगा?

हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार कुछ महत्वपूर्ण रेखाएं बताई गई हैं, इन्हीं रेखाओं की स्थिति के आधार पर व्यक्ति के जीवन की भविष्यवाणी की जा सकती है। ये रेखाएं इस प्रकार हैं-

जीवन रेखा: जीवन रेखा शुक्र क्षेत्र को घेरे रहती है। यह रेखा तर्जनी और अंगूठे के मध्य से शुरू होती है और मणिबंध तक जाती है।

मस्तक रेखा: यह हथेली के मध्य भाग में रहती है तथा जीवन रेखा के उदगम स्थल के समीप ही कही से आरंभ होकर द्वितीय मंगल क्षेत्र अथवा चंद्र क्षेत्र की ओर जाती है।

हृदय रेखा: यह मस्तक रेखा के समानांतर चलती है तथा हथेली पर बुध क्षेत्र के नीचे से आरंभ होकर गुरु क्षेत्र की ओर जाती है।

सूर्य रेखा: यह हथेली के मध्यभाग, मंगल क्षेत्र के मध्य से शुरू होकर या मस्तक अथवा हृदय के नीचे से आरंभ होकर सूर्य क्षेत्र की ओर जाती है।

भाग्य रेखा: यह हथेली के मध्यभाग में रहती है तथा मणिबंध अथवा उसी के आसपास से आरंभ होकर शनि क्षेत्र को जाती है।

स्वास्थ्य रेखा: यह बुध क्षेत्र से आरंभ होकर शुक्र की ओर जात है।

विवाह रेखा: यह बुध क्षेत्र पर आड़ी रेखा के रूप में रहती है। यह रेखाएं एक से अधिक भी हो सकती है।

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HOLI – Colorful auspicious festival

होलिका दहन  - लाभदायक अद्‌भूत प्रयोगों द्वारा संकटों से मुक्ति

आलेख – आशुतोष जोशी

होली का त्यौहार  हमारी पौराणिक कथाओं में श्रद्धा विश्वास और भक्ति का त्यौहार माना गया है तथा साथ ही होली के दिन किये जाने वाले अद्‌भूत प्रयोगों से मानव अपने जीवन में आने वाले संकटों से मुक्ति भी पा सकता है। होली हर वर्ष फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को मनायी जाती है तथा भद्रारहित समय में होली का दहन किया जाता हैं।

होली की रात होलिका दहन मे से जलती हुई लकडी घर पर लाकर नवग्रहों की लकडियों एवं गाय के गोबर से बने उपलों की होली प्रज्जवलित करनी चाहिए। उसमें घर के प्रत्येक सदस्य को देसी घी में भिगोई हुई दो लौंग, एक बताशा, एक पान का पत्ता चढाना चाहिए तथा सभी को उस होलिका की ग्यारह परिक्रमा करते हुए सूखे नारियल की होली में आहुति देनी चाहिए।

शास्त्रों के अनुसार आध्यात्मिक महत्व को देखते हुये होली की पूजा तथा दहन के पश्चात बची हुई राख के द्वारा विभिन्न प्रयोग लाभदायक हो सकते हैं।

१. होली की पूजा मुखयतः भगवान विष्णु (नरसिंह अवतार) को ध्यान में रखकर की जाती है।

२. होली दहन के समय  ७ गोमती चक्र  लेकर भगवान से प्रार्थना करें कि आपके जीवन में कोई शत्रु बाधा न डालें। प्रार्थना के पश्चात पूर्ण श्रद्धा व विश्वास के साथ गोमती चक्र दहन में डाल दें।

३. होली दहन के दूसरे दिन होली की राख को घर लाकर उसमें थोडी सी राई व नमक मिलाकर रख लें। इस प्रयोग से भूतप्रेत या नजर दोष से मुक्ति मिलती है।

४. होली के दिन से शुरु होकर बजरंग बाण का ४० दिन तक नियमित पाठ करनें से हर मनोकामना पूर्ण होगी।

५. यदि उधार दिया हुआ पैसा वापस नहीं आ रहा हैं तो होली दहन के दूसरे दिन बचे हुये कोयले से वहीं धरती पर उस व्यक्ति का नाम लिखे तथा उस नाम के उपर हरा रंग इस तरह डाल दें कि पूरा नाम लुप्त हो जाये। इस प्रयोग से वह व्यक्ति शीघ्र धन वापस कर देगा।

६. यदि व्यापार या नौकरी में उन्नति न हो रही हो, तो २१ गोमती चक्र लेकर होली दहन के दिन रात्रि में शिवलिंग पर चढा दें।

७. नवग्रह बाधा के दोष को दूर करने के लिए होली की राख से शिवलिंग की पूजा करें तथा राख मिश्रित जल से स्नान करें।

८. होली वाले दिन किसी गरीब को भोजन अवश्य करायें।
९. होली की रात्रि को सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाकर पूजा करें व भगवान से सुख – समृद्धि की प्रार्थना करें। इस प्रयोग से बाधा निवारण होता है।
१०. यदि बुरा समय चल रहा हो, तो होली के दिन पेंडुलम वाली नई घडी पूर्वी या उत्तरी दीवार पर लगाए। परिणाम स्वयं देखे।

८. होली वाले दिन किसी गरीब को भोजन अवश्य करायें। ९. होली की रात्रि को सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाकर पूजा करें व भगवान से सुख – समृद्धि की प्रार्थना करें। इस प्रयोग से बाधा निवारण होता है।१०. यदि बुरा समय चल रहा हो, तो होली के दिन पेंडुलम वाली नई घडी पूर्वी या उत्तरी दीवार पर लगाए। परिणाम स्वयं देखे।

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